मृतकों के परिजनों से ना हो मजाक



अपने परिजनों को खोने का दुःख क्या होता है यह खोने वाला परिवार ही जानता है. कोरोना काल ने हमे नई तस्वीर दिखाई साथ ही नया अनुभव भी दे गया.इस कोरोना काल में अनेकों परिवारों ने अपने प्रिय परिजनों को खोया.कितने परिवार के पालनहार खत्म हो गए,उन पालनहारों की कमी कोई पूरा नहीं कर सकता है,कुछ राहत अवश्य पहुंचा सकता है.भारत सरकार ने ऐसे ही परिवारों के लिए जिसने कोरोना काल में कोरोना के कारण अपने प्रिय परिजनों को खोया उसके लिए रुपया 50 हजार की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की.घोषणा के बाद उन परिवारों में थोड़ी उम्मीद जगी थी कि एक बार फिर उनके साथ भारी मजाक होने लगा है.जो भारत सरकार सदन में देश के समक्ष यह कह चुकी है की कोरोना के कारण एक भी मृत्यु नहीं हुई वही सरकार कोरोना के कारण अपने परिजनों को खोने वाले मृतक आश्रितों को रुपया 50 हजार की सहायता देने की घोषणा भी करती है और मृतक आश्रितों से मृतक के मृत्यु प्रमाण पत्र पर मृत्यु का कारण कोरोना लिखा हुआ लाने को भी कहती है.ये कैसा मजाक है?

कौन चाहता है कि उनके परिजन उनसे बिछड़ जाएँ ? कौन चाहता है कि वो अपने परिजन को खोकर सरकारी लाभ लेकर पेट पाले ? बहुत अभाव में ही मृतक के आश्रित सरकारी सहायता लेने जाते है ऐसे में यह भद्दा मजाक क्या उचित है?

अभी उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना से हुए मृतकों के परिवार के लिए 50 हजार सहायता राशी देने के लिए जिओ जारी किया है जिसमें यह कहा गया है कि मृत्यु का कारण कोरोना स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए तभी रुपया 50 हजार की मदद मिलेगी जबकि कोरोना से हुई मौतों के मामले में 90 प्रतिशत डेथ सर्टिफिकेट में मल्टी ऑर्गन फ़ेलयुर, लंग डिसीस या कार्डियक अरेस्ट ही मृत्यु का कारण लिखा गया है अब ऐसे में वो बेसहारा परिवार उस डेथ सर्टिफिकेट में मृत्यु का कारण कोरोना फिर से कहाँ से लिखवा का लाये.कई तो ऐसी महिलाएं बेसहारा हुई हैं जिनके बच्चे इतने छोटे हैं कि बच्चों को छोड़कर कहीं 2 रोटी की तलाश में भी नहीं जा सकती फिर वो सरकारी दफ्तर के चक्कर कैसे लगा पायेगी? कितने तो बूढ़े माँ-बाप हैं जो बिस्तर से हिल नहीं सकते ऐसे में वो कहाँ दफ्तर के चक्कर लगा पाएंगे,किसी और से काम करवाएंगे तो रिश्वत का पैसा कहाँ से लायेंगे.इस बीच में कुछ ऐसे ठेकेदार भी जन्म ले चुके हैं जो पैसे दिलाने के लिए आधे-आधे का सौदा करने में जुटे हैं.

सरकार को ऐसे निह्सहायों का दर्द समझना होगा.सरकार के पास पर्याप्त मशीनरी है जिसका उपयोग करते हुए ऐसे परिवारों को सरकार सहजता से सहायता पहुंचा सकती है.मृत्यु का कारण सपष्ट करने के लिए कोविड जाँच की विभिन्न रिपोर्टें जैसे आरटीपीसीआर जाँच,सिटी स्कैन की रिपोर्ट आदि को प्रयाप्त मानते हुए उसकी जाँच करा लें और सही पाए जाने पर उन्हें आर्थिक मदद दे दें तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि सरकार खुद ही कह चुकी है कोरोना से एक भी जाने नहीं गई ऐसे में मृतक परिवार मृत्यु का कारण कोरोना कहाँ से साबित कर पायेगा ?

(जितेन्द्र झा)

v Thakur

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