आप की सोच ही आपको बड़ा बनाती है


अपनी सकारात्मक सोच से अपनी अहमियत बढ़ाते रहें और विपरीत परिस्थिति में भी संतुलन बनाये रखे। ये संसार जरूरत के नियम पर चलता है।सर्दियों में जिस सूरज का इंतजार होता है, उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है।

आप की कीमत तब तक होगी जब तक आपकी जरुरत है। तालाब एक ही है उसी तालाब मे हंस मोती चुनता है और बगुला मछली सोच सोच का फर्क होता है। आप की सोच ही आपको बड़ा बनाती है। यदि गुलाब की तरह खिलना चाहते हो तो काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी।

Popular posts from this blog

स्वस्थ जीवन मंत्र : चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठ में पंथ आषाढ़ में बेल

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव!

राष्ट्रीयता और नागरिकता में अंतर