देव-उत्थान का पर्व है "गोवर्धन पूजा"


सुबह सुबह उठ कर लड़कियां अपने भाई को शाप देती हैं जा तेरा नाश हो जाय... तू दरिद्र हो जाय... तेरी प्रतिष्ठा समाप्त हो जाय... फिर शाम को रेंगनी का कांट जीभ में चुभो कर शाप उतारती हैं। मेरा भइया यशश्वी हो, दीर्घायु हो, चहुँलोक में उसकी प्रतिष्ठा फैले... इस परम्परा के पीछे की कथाएँ जाने कितने रूप में घूमती हैं, पर कथा के मूल में भाई-बहन का प्रेम ही है यही पूर्वांचल की गोवर्धन पूजा है।

गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण ने प्रारम्भ की थी भाई दूज का पर्व उससे बहुत पहले से था, कृष्ण ने उस दिन गोवर्धन को भी पूजने की परम्परा शुरू की क्यों की? भइया कौन होता है जो पोषण करे, साहस दे, और विपत्ति में स्वयं छत बन कर छोटे की रक्षा करे! इसीलिये लड़कियां अपने छोटे भाई को भी भइया कहती हैं कहीं कहीं... गोवर्धन पशुओं के लिए चारा, फसलों के लिए जल, औषधि आदि प्रदान करते थे क्रोधित इंद्र ने जब नन्द गांव को वर्षा से डूबो देने का प्रयास किया तब भी गोवर्धन ने रक्षा की भावुक जनमानस ने उन्हें भइया कहा, स्त्रियों ने उनकी प्रशंसा में गीत रचा, तभी वे लोक के भइया हुए... लोक में प्रतिष्ठा पानी है तो उसका हिस्सा बनना पड़ता है उसके सुख-दुख में, उसके शोक-उल्लास में, उसकी परम्पराओं में, उसकी रीतियों में... लोक कभी थोथा ज्ञान नहीं स्वीकारता...

लोक के रङ्ग अद्भुत होते हैं...यहाँ गोबर से यमलोक बनता है, जिसमें यमराज, उनकी बहन यमुना और सांप, बिच्छू आदि विषैले जीवों की प्रतिमाएं बनती हैं साक्षात यमलोक... फिर लड़कियां अधिकार पूर्वक उस यमलोक में घुस कर ओखल से कूट देती हैं यम को... शायद यह संदेश देती हों कि मेरे भाई की ओर देखा भी तो कूट देंगे... कथा कुछ यूँ है कि आज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के यहाँ गए थे और उन्हें बचन दिया था कि इस दिन जो बहन अपने भाई के लिए प्रार्थना करेगी उसके भाई की अकाल मृत्यु नहीं होगी इसीलिए आज यम यमुना की पूजा होती है और लड़कियां अपने भाई को तिलक लगा कर उसके दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। गोवर्धन पूजा देव-उत्थान का पर्व है कल से लोग अपने विवाह योग्य बच्चों के लग्न की चिन्ता में लगेंगे देव उठ गए हैं... आप सब के जीवन में भी प्रकाश फैले...


सर्वेश तिवारी श्रीमुख

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