जबरिया उठाई गई कार की वापसी के लिए पुलिस अधीक्षक से की गई गुहार


सुल्तानपुर / लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में लूट और ठगी के ऐसे – ऐसे प्रकरण सामने आते है जिससे सवाल उठने लगता है कि क्या हम वास्तव में एक ‘विधि द्वारा शासित राष्ट्र’ में रहते हैं? राजधानी लखनऊ के देवा रोड, चिनहट के निवासी गोपाल चंद्र बागची ने पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर को स्पीड पोस्ट डाक/ व्हाट्स एप के द्वारा प्रार्थनापत्र भेजकर कथित तौर पर जबरिया उठा ली गई कार की वापसी के लिए गुहार लगाई हैं।

प्रार्थनापत्र के अनुसार उनकी स्कोडा कार यू.पी.32 एफ.एस.3024 को कथित तौर पर  सूर्यभान मिश्रा , जयकार मिश्रा आदि द्वारा 2 मार्च 2015 को हड़प ली गई थी।गोपाल चंद्र बागची ने दावा किया है कि सूर्यभान मिश्रा और एक अधिवक्ता ने उनके साथ फर्जीवाड़ा करके एक हलफनामा में यह लिखवा लिया हैं कि उन्होंने अपनी कार बेचा हैं जबकि सच्चाई यह है कि सूर्यभान मिश्रा – जयकार मिश्रा अपने दो अन्य साथियों के साथ 2 मार्च 2015 को उनके विराट खंड , गोमती नगर स्थिति घर आए थे और उनकी कार को चलाकर देखने के बहाने से ले गए थे, जिसके बाद उसे जबरिया हड़प लिया। इसके अलावा सूर्यभान मिश्रा ने गोमती नगर थाने के विवेचक से भी मिलकर जबरिया उठा ली गई कार के संदर्भ में पंजीकृत प्रथम सूचना रिपोर्ट में एफ.आर. लगवा लिया था।

सूर्यभान मिश्रा और जयकार मिश्रा जमीन बेचने के नाम ठगी करने के आरोप में जेल में बंद हैं।गोपाल चंद्र बागची के अनुसार उनकी स्कोडा कार यू.पी.32एफ.एस 3024 सुल्तानपुर में चलाई जा रही है। गोपाल चंद्र बागची ने पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर से अपनी वृद्धावस्था और बीमारी का संदर्भ देते हुए कहा हैं कि वे एक  70 वर्ष के व्यक्ति हैं जो चलने – फिरने में भी असमर्थ हैं। उनकी पत्नी भी अपंग है और दूसरे  गंभीर रोगों से ग्रस्त हैं। इसलिए उनके ऊपर दया करके उनकी स्कोडा कार यू.पी.32 एफ.एस.3024 को वापस दिलाई जाय और सूर्यभान मिश्रा द्वारा संगठित ठगी करने के लिए बनाए गए गिरोह के दूसरे सदस्यों  पर सतर्क  निगाह रखी जाय जिससे कि ये किसी अन्य को ठगी का शिकार न बना पाए।

गोपाल चंद्र बागची के तमाम दावों की क्या सच्चाई है , यह तो गहन जांच का विषय है लेकिन इतना जरूर समझ में आता है कि जमीन बेचने के नाम पर ठगी के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके सूर्यभान मिश्रा –  जयकार मिश्रा जैसे लोग  इतनी बड़ी ठगी बिना पुलिस की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के कर ही नही सकते हैं। अब क्या  सुल्तानपुर में जिसके पास से भी सूर्यभान मिश्रा – जयकार मिश्रा और उनके दो अन्य साथियों द्वारा 2 मार्च 2015 को कथित तौर पर जबरिया हड़पी गई गोपाल चन्द्र बागची की कार बरामद हो , उनसे जमीन के नाम पर ठगी करके सूर्यभान मिश्रा – जयकार मिश्रा द्वारा प्लाट खरीददारों की जो गाढ़ी कमाई लूटी गई , उसके निवेश के बारे में भी पुलिस पूछताक्ष करेगी या नहीं , यह सवाल सुल्तानपुर और लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट,दोनों जगहों की पुलिस से तो बनता ही हैं। 


प्रस्तुति : नैमिष प्रताप सिंह

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