सदस्या ने संयुक्त जिला चिकित्सालय एवं वृद्धाश्रम का किया औचक निरीक्षण

श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या कुमुद श्रीवास्तव ने संयुक्त जिला चिकित्सालय, भिनगा का औचक निरीक्षण कर अस्पताल में भर्ती मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान सदस्या ने जच्चा-बच्चा वार्ड, महिला वार्ड, लेबर रूम सहित अन्य वार्डों का गहनता से निरीक्षण किया तथा साफ-सफाई हेतु सम्बन्धित को निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधीक्षक को निर्देशित किया की अस्पताल में भर्ती मरीजों को कोविड-19 नियमों का पालन अवश्य करायें एवं गर्भवती महिलाओं को खान-पान, दवा-इलाज, टीकाकरण आदि में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। 

निरीक्षण के दौरान सदस्या ने प्रसव कक्ष में लगे खिड़की पर पर्दा न होने एवं डिलीवरी में मानक के अनुरूप साफ-सफाई न पाये जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधीक्षक को निर्देश दिया कि प्रसव कक्ष में मानक के अनुरूप साफ-सफाई कराकर सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरूस्त किया जाय। उन्होने कहा कि यदि भविष्य में अस्पताल का पुनः निरीक्षण किये जाने पर यदि कोई कमी मिलती है तो शासन को पत्र प्रेषित कर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। उन्होने जोर देते हुए कहा कि देश एवं प्रदेश की सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए सरकार द्वारा प्रदत्त सभी सुविधाएं उन्हें समय से मुहैया करायी जाएं। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, महिला थाना प्रभारी अन्य सम्बन्धित अधिकारीगण मौजूद रहे।

तदोपरान्त सदस्या ने समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित भिनगा स्थित वृद्धाश्रम में पहुंचकर वरिष्ठ जनों का कुशलक्षेम जाना तथा फूल माला पहनाकर उनका सम्मान भी किया। इस अवसर पर सदस्या ने अपने सम्बोधन में कहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान हर दिन, हर पल हमारे मन में होना चाहिए, लेकिन उनके प्रति मन में छुपे इस सम्मान को व्यक्त करने के लिए एवं बुजुर्गों के प्रति चिंतन की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि बुजुर्ग हमारे लिए ईश्वर का अवतार होते हैं, जिनके आशीर्वाद से हमारा पालन पोषण होता है, उनके प्रति मन में सम्मान और अटूट प्रेम होना स्वभाविक सी बात है लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण होता है, उस अवस्था में उनके साथ होना, जब वे असहाय और अक्षम होते हैं। यही उनके प्रति हमारे प्रेम और सच्ची श्रद्धा होती है।
 
उन्होंने यह भी कहा कि आज हमारे समाज में बुजुर्गों को दोयम दर्जे के व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों के सामने स्वास्थ्य के अतिरिक्त मुख्य समस्या अकेलेपन की है। बड़े होने पर बच्चे अलग रहने लगते हैं और केवल विशेष अवसरों पर ही वे उनसे मिलने आते हैं। कभी-कभी उनसे मिले महीने या वर्ष भी गुजर जाते हैं। इसलिये हम सबका दायित्व बनता है कि अपने-अपने माता-पिता को अपने पास रखें और उनके अकेले पन को दूर रखें। आश्रम में जो भी वृद्धजन आवासित है, यदि उनको कोई समस्या है तो वे हमे कभी भी बता सकते हैं मैं उनकी सेवा के लिये हमेशा तत्पर रहूंगी।

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