अपने साथ-साथ दूसरों के लिये भी शुभ की कामना करें

 
तन मन और धन शुद्ध रखना चाहिए वृद्ध माँ-बाप की सेवा से तन, दूसरों के लिये आंतरिक शुभ की कामना से मन, सेवाकार्यों में खर्च करने से धन की शुद्धि होती है। न केवल आपका तन अपितु आपका मन भी शुद्ध हो और तन-मन ही नहीं अपितु आपका धन भी शुद्ध हो।
 
तन की शुद्धि के लिये यदि आप नहाना भूल भी जायें तो कोई बात नहीं, मगर अपने वृद्ध माँ-बाप को नहलाना या उनकी सेवा का कोई भी अवसर मत भूलें, इससे आपका तन इतना स्वच्छ रहेगा कि लोग अनायास आपकी तरफ खिंचे चले आयेंगे। मन की शुद्धि के लिये सर्व प्रथम उस प्रभु को धन्यवाद दें, जिस हाल में रहें उसमें प्रसन्न रहें संतोष रखें दूसरा व्यक्ति जैसा भी है अपने लिये है
 
उसके बारे में न सोचकर अपने बारे में सोचें अपनी प्रार्थना में हमेशा अपने साथ-साथ दूसरों के लिये भी शुभ की कामना करें मन की शुद्धि के लिये इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं। धन की शुद्धि के लिये आवश्यकता से अधिक जहाँ संग्रह होने लगता है बस वहीँ धन अशुद्ध हो जाता है। कैसे भी हो आपका धन सेवाकार्यों में लगे धन-शुद्धि के लिये कोई अलग से अनुष्ठान कराने की आवश्यकता नहीं। जिसके ये तीनों शुद्ध हैं उसी का जीवन शुद्ध है।

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